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श्री गांधी इंटर कॉलेज संक्षिप्त इतिहास

सन 1975 से अंकुरित आज विशालकाय वट वृक्ष की तरह अपनी शाखाओं में माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश इलाहाबाद की विभिन्न मान्यताओं से युक्त शिक्षा जगत में निरंतर प्रगति करते हुए क्षेत्र एवं दूरस्थ क्षेत्रों के बालक बालिकाओं को शिक्षित करते हुए उनकी जीविका का साधन बना हुआ है । विद्यालय शिक्षा जगत में अपना प्रभुत्व बनाए हुए है। इस विद्यालय के अनुकरण में उस समय अध्ययन कर रही कुमारी आशा अग्रवाल सुपुत्री सेठ श्री सीताराम अग्रवाल विशेषतयः प्रादुर्भाव का कारण बनी। उस समय महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज तिकुनिया खीरी में आवागमन के विशेष साधन ना होने के कारण विलम्ब की स्थिति में पहले घंटे से छूट देने की स्थिति में न होने के स्वयं विद्यालय बना लेने के व्यंग से सेठ श्री सीताराम अग्रवाल को आक्रोश तो उत्पन्न हुआ किंतु उसी की प्रेरणा से वास्तव में इस विद्यालय की नीव पड़ी ।

प्रथम उनकी ही पुरानी इमारत में दो कक्षों में छोटे बच्चों की पढ़ाई आरंभ की जाने लगी पश्चात श्री भानाराम अग्रवाल द्वारा प्रदत्त भूमि पर निर्माण किए गए छह कक्षों का निर्माण उद्घाटन 28 जनवरी 1977 को तत्कालीन माननीय उपश्रम मंत्री श्री बाल गोविंद वर्मा द्वारा किया गया, जिससे कक्षा 8 की अस्थाई मान्यता व कक्षा 9 व 10 की व्यक्तिगत कक्षाओं का संचालन किया जाने लगा।

श्री सुरेंद्र कुमार व श्री ज्ञान प्रकाश सक्सेना द्वारा प्रधानाचार्य के रूप में विद्यालय की बागडोर संभाली व सेठ श्री सीताराम अग्रवाल के प्रबन्धकत्व में विद्यालय शैनै-शैनै अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होने में जुट गया। दिनांक 15 अप्रैल 1978 को बेसिक शिक्षा परिषद से जूनियर हाई स्कूल की अस्थाई मान्यता प्राप्त हुई तथा बेसिक शिक्षा परिषद लखीमपुर खीरी से प्रधानाचार्य के रुप में श्री भाई लाल मिश्र व सहायक के रूप में कुमारी अलका राय, अशोक कुमार जलज का विभागीय अनुमोदन कराया गया कालांतर में श्री रामकृष्ण मिश्र ,प्रमिलेश चन्द्र तिवारी को भी अनुमोदन प्राप्त हुआ | प्रबंध समिति में श्री अवध बिहारी लाल वर्मा संरक्षक ,लाला श्री सूरजभान अग्रवाल अध्यक्ष, श्री रामविलास गुप्त उपाध्यक्ष ,श्री सीताराम अग्रवाल प्रबंधक ,श्री जगदीश अग्रवाल मंत्री ,श्री जयकरण नाथ पांडेय उपमंत्री ,श्री सीताराम अग्रवाल (ट्रक वाले) कोषाध्यक्ष,श्री जगदीश प्रसाद गुप्त प्रचार मंत्री, लेफ्टिनेंट भंवर सिंह शैक्षिक परामर्शदाता, श्री बीपी भल्ला नैतिक परामर्शदाता, श्री राजपाल सिंह कानूनी परामर्श दाता ,श्री भानाराम अग्रवाल ,श्री ज्वाला प्रसाद गुप्ता ,श्री अमरनाथ अग्रवाल, श्रीचंदनारायण पुरवार, श्री प्रदीप कुमार पुरवार सदस्य थे।

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पफलत: जूनियर हाई स्कूल को उच्चीकृत करते हुए 7 क(क) के अंतर्गत 30 नवंबर 1989 को हाई स्कूल की कला वर्ग की वित्तविहीन मान्यता ली गई इसी क्रम में 1994 में हाईस्कूल वाणिज्य वर्ग ,1998 में इंटरमीडिएट साहित्य वर्ग व 2002 में इंटरमीडिएट वाणिज्य वर्ग की मान्यता दी गई इस बीच चकबंदी द्वारा प्रदत्त व भूमि क्रय करके 8 कक्षो का निर्माण कराया गया कालांतर में समय व परिस्थितियां बदली और भी कक्षों का निर्माण हुआ विद्यालय आरंभ 1975 से 1982 तक प्रधानाचार्य श्री भाई लाल के नेतृत्व में जूनियर हाई स्कूल की मान्यता मिली। 1983 से 2000 तक प्रबंधक पद पर रहे श्री जगदीश अग्रवाल व प्रधानाचार्य के नेतृत्व में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट साहित्य वर्ग की मान्यता प्राप्त हुई सन 2000 से 2011 प्रबंधक पद पर आसीन श्री वी०पी०भल्ला व प्रधानाचार्य श्री भाई लाल मिश्रा तथा श्री अशोक कुमार जलज ( 2009) के नेतृत्व में इंटरमीडिएट वाणिज्य वर्ग तथा इंटरमीडिएट कला व गृह विज्ञान मान्यता प्राप्त कराई गई पंजीकरण 2011 - 14 में प्रबंधक सेठ श्री सीताराम अग्रवाल व प्रधानाचार्य श्री अशोक कुमार जज के संयोजन संयोजन से इंटरमीडिएट कृषि व विज्ञान वर्ग की मान्यता के लिए आवेदन किया गया फलत: स्वर्गीय प्रबंधक सेठ श्री सीताराम अग्रवाल के पश्चात उनके सुपुत्र श्री राजेश अग्रवाल (2014-15) प्रबंधक के पद पर निर्वाचित किए गए जिनके अथक प्रयासों से 2016 में कृषि व विज्ञान वर्ग की मान्यता प्राप्त हुई उल्लेखनीय है कि इस प्रबंध समिति के निर्वाचन में 595 साधारण सभा के सदस्य बनाए जाने का श्रेय श्री विकास अग्रवाल को जाता है ।यह विद्यालय वर्ष 2004 से लगातार बोर्ड परीक्षा केंद्र रह रहा है। वर्तमान में कक्षा कक्ष द्वारा समुचित व्यवस्था तथा उत्कृष्ट परीक्षा परिणामों द्वारा समलंकृत यह संस्था श्री राजेश अग्रवाल तथा प्रधानाचार्य डॉ अजय कुमार के नेतृत्व में निरंतर विकसित होते हुए पुष्पित व फलित हो रही है ।

" गरिमामय भविष्य के प्रति मंगल कामना ।"